जीवन यह मानव के लिए विधाता की अनमोल देण है.
इसे हर इन्सान अपने अपने तरीके से जीना चाहता है
इस के आधार से मनुष्य ज्ञानप्राप्ति , भगवन और
स्वर्गसुख की प्राप्ति जेसे नामुकिन कार्यो पर विजय हासिल
कर सकता है.
जिंदगी के दो प्रमुख स्त्रोत है १)जिन्दगी जीना २) मनचाहे तरीकेसे जिन्दगी जीना
परमार्थ से भगवन प्राप्ति होती है मन चाहा जीवन जी सकते हो
परमार्थ का पहला पद्य : यह जीवन भगवन की देण है उसे कभी मत भूलो
स्व + आत्मा+ अभिमुखता =स्वात्मभिमुखता यही परमार्थ की पहली शिडी है
और भगवन प्राप्ति अंतिम सीडी
जिंदगी उस कतार की तरह है जहा से हम इसमें जुड़ते है
तो खुद को सब के पीछे पाकर यह सोचते है हम
सब के पीछे है पर कोई हमे नही देख रहा
परन्तु जब हम मध्य में आते है तो पता चलता है के
बहोत लोग हमारे आगे और बहोतसे पीछे है
पर जब हम इसे पार कर जाते है तब पता चलता है
के हमने जहा से सुरुवात की थी अभी वहा
कोई पहला है बस हमने अपना सफर खत्म किया
पर जिंदगी जहा क तहा है .....................
इसे हर इन्सान अपने अपने तरीके से जीना चाहता है
इस के आधार से मनुष्य ज्ञानप्राप्ति , भगवन और
स्वर्गसुख की प्राप्ति जेसे नामुकिन कार्यो पर विजय हासिल
कर सकता है.
जिंदगी के दो प्रमुख स्त्रोत है १)जिन्दगी जीना २) मनचाहे तरीकेसे जिन्दगी जीना
परमार्थ से भगवन प्राप्ति होती है मन चाहा जीवन जी सकते हो
परमार्थ का पहला पद्य : यह जीवन भगवन की देण है उसे कभी मत भूलो
स्व + आत्मा+ अभिमुखता =स्वात्मभिमुखता यही परमार्थ की पहली शिडी है
और भगवन प्राप्ति अंतिम सीडी
जिंदगी उस कतार की तरह है जहा से हम इसमें जुड़ते है
तो खुद को सब के पीछे पाकर यह सोचते है हम
सब के पीछे है पर कोई हमे नही देख रहा
परन्तु जब हम मध्य में आते है तो पता चलता है के
बहोत लोग हमारे आगे और बहोतसे पीछे है
पर जब हम इसे पार कर जाते है तब पता चलता है
के हमने जहा से सुरुवात की थी अभी वहा
कोई पहला है बस हमने अपना सफर खत्म किया
पर जिंदगी जहा क तहा है .....................


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