Tuesday, May 29, 2012

सनातन ज्ञान अजर अविनाशी मार्ग है इसकी व्याख्या अनन्त है इसको गीता में भगवान श्री कृष्ण ने थोड़े से शब्दों में स्पष्ट किया कि
राजविद्या राजगुह्यं पवित्रमिदमुत्तमम् ।
प्रत्यक्षावगमं धर्म्यं सुमुखं कर्तुमव्ययम् ।।
अर्थात्
सनातन विज्ञानसहित ज्ञान है जो समस्त विद्याओं का राजा है जो समस्त गोपनीय ज्ञान का राजा है जो पवित्र अति उत्तम प्रत्यक्ष फल देने वाला धर्मयुक्त एवं स्वयं में साधने वाले हेतु अत्यंत सुगम व अविनाशी है
आज हमारे देश को हमारे समाज को हमारी नई पीढ़ी को इस ज्ञान की अत्यंत आवश्यकता है अतः हमें प्रयास करना चाहिये कि हमारे देश के विद्यालयों मेँ इसकी शिक्षा अनिवार्य कर दी जाये क्योंकि बिना श्रीगीता ज्ञान के नवयुवा पीढ़ी में तब्दीली लाना असम्भव है
।। जय जय श्री गोविन्दः ।।

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