Friday, May 25, 2012

पिछड़े मुस्लिमों की सहायता के उपाय

“दलित तो दलित होता है, चाहे वो हिन्दू हो या मुसलमान… सब दलितों को आरक्षण मिलना चाहिए… उनकी भलाई के बारे में हमने नहीं सोचा तो कल सड़कों पर खून बहेगा.” ऐसे कुछ विचार श्री रामदेव जी, जो कि भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के नेता हैं, ने अभी कुछ दिन पहले मुसलमानों के एक समूह में खड़े होकर व्यक्त किये हैं. श्री रामदेव जी ने इस समूह में यह मांग की कि ‘अल्पसंख्यक’ दलितों को भी अनुसूचित जाति और जनजाति में शामिल किया जाए.
हठयोग के धुरंधर प्रचारक ने प्रतिज्ञा कर ली है कि मुसलमानों के हक़ की आवाज को मौलानाओं से ज्यादा अब वो उठाएंगे. पर उनकी इस घोषणा ने उनके समर्थकों और विरोधियों दोनों को ही दोराहे पर ला खड़ा किया है. दलित मुसलमानों को न्याय न मिलने पर सड़कों पर खून खराबे की भविष्यवाणी ने जहां एक तरफ राष्ट्रवादी गुटों में हलचल मचा दी है वहीं दूसरी तरफ ‘अल्पसंख्यकों’ के अधिकारों के लिए दिन रात एक करने वाले दलों की भी नींद उड़ा दी है! क्योंकि ऐसी भविष्यवाणी तो अल्पसंख्यक प्रेम के लिए मशहूर कांग्रेस ने तब भी नहीं की थी जब उसने उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले मुसलमानों को ओबीसी कोटे में अलग से कोटा दिया था!
आज के दिन केवल हिन्दू, सिख, और बौद्ध ही संविधान के अनुच्छेद ३४१ के तहत अनुसूचित जाति और जनजाति के अंतर्गत आरक्षण पाते हैं. जो भी आदमी/संगठन (दलित) मुसलमानों की पीड़ा से दुखी है, हम उनका सम्मान करते हैं. पर साथ ही हम यह भी घोषणा करते हैं कि मुसलमान और ईसाई धर्मों को अनुसूचित जाति/जनजाति में शामिल करने की कोई भी मांग पूरी तरह देश, इस्लाम, ईसाई, और हिन्दू धर्मों के विरुद्ध है और इतना ख़तरा पैदा कर सकती है जितना आज़ादी से पहले हजार साल तक भारत पर हमला करने वाले विदेशी भी नहीं कर सके.
याद रहे कि भारत में लगभग ५०% मुसलमानों को ओबीसी कोटे के तहत पहले ही आरक्षण मिलता है. पर सच्चर कमेटी ने पाया कि इस आरक्षण के बावजूद भी ‘ओबीसी मुस्लिम’ अपने ‘ओबीसी गैर मुस्लिमों’ से प्रतियोगिता में पिछड़ जाते हैं. इसलिए मुसलमानों के लिए ओबीसी कोटे में भी अलग से ४.५% कोटा बना दिया गया है जिसे १५% तक बढाने की मांग चल रही है. यही नहीं, तमिलनाडु, आन्ध्र, कर्नाटक, और बिहार जैसे राज्यों में मुसलमान इससे भी ज्यादा आरक्षण लेते हैं. और यह आरक्षण उनको मिलने वाले ‘अल्पसंख्यक विशेष अधिकार’ से अलग हैं! भारत में रहने वाला ‘अल्पसंख्यक’ मुस्लिम समुदाय यहाँ इतने अधिकार पाता है कि जितने मुस्लिम देशों में रहने वाले बहुसंख्यक मुस्लिम भी नहीं पाते. 
खैर, जो भी (दलित) मुसलमानों के दुःख से वास्तव में दुखी हैं उनके लिए हम कुछ सुझाव देते हैं. हमने ये सुझाव बड़े सरल रखे हैं ताकि इन पर अमल करने में कोई देरी और मुश्किल न हो. इसके बाद हम वो कारण सामने रखेंगे जिनकी वजह से अनुच्छेद ३४१ में मुस्लिम और ईसाई मतों को शामिल करना देश के लिए घातक सिद्ध होता है.
श्री रामदेव जी को ५ सूत्रीय कार्यक्रम - मुसलमानों और ख़ास तौर पर ‘दलित’ मुसलमानों की सहायता के उपाय
न केवल श्री रामदेव जी, बल्कि हर एक वो नेता जिनके दिलों में अगड़े और पिछड़े मुसलमानों के लिए कुछ करने की तड़प है और जिनको लगता है कि ‘अल्पसंख्यक’, ‘ओबीसी’ आदि कोटों में शामिल करने के बावजूद भी मुसलमान भाई दबे कुचले हुए हैं, ऐसे सज्जनों के लिए यहाँ बड़े सरल सूत्र सुझाए जा रहे हैं. (यदि इन सुझावों को पहले ही अमल में लाया जा चुका है तो अग्निवीर इसका स्वागत करता है और साथ ही अनुरोध करता है कि इस विषय में विस्तार से औपचारिक घोषणा करें.) पर उससे पहले कुछ बातों का उल्लेख जरुरी है.
(दलित) मुस्लिम का पिछड़ापन केवल पैसों की तंगी के कारण नहीं है. बल्कि समाज के दूसरे तबकों से विश्वास, बराबरी, और सम्मान की कमी ज्यादा बड़े कारण हैं. इसलिए पिछड़े तबके के लिए काम करने वाले किसी भी संत महात्मा के लिए यह जरुरी है कि वो इन मामलों में खुद एक उदाहरण सामने रखे.
इसलिए देश के बड़े संगठन और महत्त्वपूर्ण लोगों जैसे भारत स्वाभिमान ट्रस्ट, पतंजलि योगपीठ, श्री रामदेव जी, श्री मुलायम सिंह यादव जी, श्री राहुल गांधी जी आदि का यह दायित्त्व बनता है कि पिछड़े मुसलमानों/अल्पसंख्यकों को बराबरी और विश्वास दिलाकर खुद एक मिसाल पेश करें ताकि बाकी लोग भी प्रेरणा ले सकें. अल्पसंख्यक/पिछड़ा अल्पसंख्यक प्रेम को सार्थक करने के लिए अग्निवीर इन महानुभावों को पांच सूत्रीय कार्यक्रम देता है और यह विश्वास दिलाता है कि वह खुद इस मसले में तन मन धन से सहयोग करेगा.
१. श्री रामदेव जी यह वचन दें कि उनकी कम्पनियों और ट्रस्टों के खर्च का ७५% केवल दलितों के विकास, शिक्षा, और रोजगार पर खर्च होगा, खासकर (दलित) मुस्लिमों के विकास पर.
२. श्री रामदेव जी की हर कंपनी, ट्रस्ट, और राजनैतिक या सामाजिक दलों की कमान (दलित) मुसलमानों के हाथ में होगी. इन दलों और कम्पनियों के प्रमुख, वक्ता, और योजनाकार दलित मुसलमान होंगे.
३. उनकी सब पत्रिकाओं और पुस्तकों का सम्पादन दलित मुस्लिम ही करें. जिससे दुनिया वाले यह देख सकें कि काबिलियत केवल अगड़े गैर मुसलमानों के हाथ की ही जागीर नहीं है.
४. उनकी सब कम्पनियों, ट्रस्टों, आश्रमों में खाना बनाने से लेकर रसोई का सारा काम दलित मुसलमान ही करें. इससे दुनिया में छूत अछूत की मूर्खता के खिलाफ कड़ा सन्देश जाएगा.
५. श्री रामदेव जी इस बात से आहत हैं कि अक्सर लोग कहते हैं कि सब आतंकवादी मुसलमान होते हैं. इस बात को वह पूरी तरह झूठ समझते हैं. अब इस बात को दुनिया में साबित करने के लिए उनको चाहिए कि अपनी सुरक्षा में लगे सब जवानों को ऐसे सुरक्षाकर्मियों से बदल दें जो पांच बार के नमाजी हों, जो चेहरे पर दाढ़ी रखें, और जिसके माथे पर नमाज का निशान हो. ऐसा करते ही इस्लाम के बारे में लोगों की गलत धारणा मिट जायेगी. केवल श्री रामदेव जी ही नहीं बल्कि वो सब नेता जिनका दिल ‘मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना’ के तराने गाता है, उन सबको यह करना चाहिए.
खासकर इन सब महानुभावों को चाहिए कि व्यक्तिगत सुरक्षा में लगे सब जवान वही लोग हों जो सामने आकर खुद को कट्टर मुसलमान कहते हों. जरा सोचिये, जब सब बड़े नेताओं की व्यक्तिगत जेड सुरक्षा कट्टर मुसलमानों के हाथ में होगी तो फिर कौन माई का लाल इस्लाम को आतंकवाद से जोड़ने की हिम्मत कर सकेगा?
(यहाँ तक कि सिखों को भी कुछ लोगों की कारस्तानी के कारण आतंकवाद से जोड़ा गया. पर क्योंकि सिख सेना, पुलिस, और हर सुरक्षा के विभाग में बड़ी संख्या में मिलते हैं, इस कारण कोई सिख मत को आतंकवाद से नहीं जोड़ सका और आज भी सिख जाति एक देशभक्त और वीर समूह के रूप में देश में जानी जाती है)
कितने दुःख की बात है कि पाकिस्तान जैसे कट्टरपंथी देश में भी वहां के नेता किसी कट्टर दाढ़ी रखे पांच बार के नमाजी मुसलमान को अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए नहीं रखते. पर भारत के नेताओं और खासकर श्री रामदेव जी के पास यह सिद्ध करने का सुनहरा मौक़ा है कि मुसलमानों का आतंक से कोई लेना देना नहीं है, बस इसके लिए अपनी सुरक्षा के लिए ऐसे मुसलमान भाइयों को चुन लें. बड़े दुर्भाग्य की बात है कि ‘मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना’ की दिन रात रट लगाने वाले नेता एक ख़ास मजहब के लोगों को अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा में कभी नहीं लगने देते. हमें आशा है कि श्री रामदेव जी मनसा वाचा कर्मणा एक होकर सच्चे ‘अल्पसंख्यक’ हितैषी सिद्ध होंगे.
यह कदम ‘दलित मुसलमानों’ के लिए न केवल बराबरी का पैगाम लाएगा बल्कि उनके लिए रोजगार भी पैदा करेगा जो कि हर ‘अल्पसंख्यक’ हितैषी का सपना है.
इन पांच बिन्दुओं पर अग्निवीर को श्री रामदेव जी और अन्य ‘दलित’ मुस्लिम हितैषी नेताओं की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है. अग्निवीर तन मन धन से उन सब नेताओं का सहयोग करेगा जो इन पांच बातों को व्यवहार/अमल में उतारेंगे (यह कोई मायने नहीं रखता की अग्निवीर का इन मुद्दों पर निजी मत क्या है. किन्तु जो किसी भी मुद्दे का समर्थन करते हैं, उनकी इमानदारी तो केवल कर्मों से ही झलकती है, बातों से नहीं. अग्निवीर तो इस इमानदारी का कायल है, चाहे वैचारिक मतभेद क्यूँ न हों).

No comments:

Post a Comment